Friday, September 21, 2018

कंबाईन हारवेस्टिंग पर सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम का होना अनिवार्य: ढ़ेसी


भिवानी | प्रदेश के मुख्य सचिव श्री डी.एस.ढ़ेसी ने कहा है कि पर्यावरण को प्रदुषित होने से बचाने के लिए कंबाईन हारवेस्टिंग मशीन पर सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगाना अनिवार्य है। इसके साथ कृषि विभाग के अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में फसल अवशेष प्रबंधन करना सुनिश्चित करें। उन्होंने सभी एसडीएम को पूर्व में फसल अवशेष जलाने वाले गांवों में दौरा करने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेशभर के उपायुक्तों व कृषि एवं कल्याण विभाग के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव श्री ढ़ेसी ने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए प्रदेशभर के 840गांवों में कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए वे इन गांवों में जाकर ग्रामीणों को इन कृषि यंत्रों का प्रयोग करने व फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जागरूक करें। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर के उपायुक्तों से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाने व व्यक्तिगत तौर पर यंत्र खरीदने के टारगेट के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को कस्टम हायरिंग सेंटर पर जाकर वेरीफिकेशन करने के निर्देश दिए। उन्होंने बिलों के आधार फिजीकल वेरीफिकेशन करवाने और संबंधित किसानों के खातों में सब्सिडी डलवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016-17 में जहां-जहां पर पराली जलाई गई है, उनकी सूची तैयार की जाए और वहां पर किसानों को पराली नहीं जलाने के प्रति जागरूक किया जाए।
उन्होंने बताया कि 15 सितंबर से जागरूकता अभियान चल रहा है, जिसमें गांवों में किसानों को पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इन जागरूकता अभियानों में किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की पूरी जानकारी दी जाए। इस दौरान उपायुक्त अंशज सिंह ने बताया कि भिवानी जिले में बवानीखेड़ा, मुंढ़ाल कलां व खुर्द, मिताथल, बडेसरा, चांग, तिगड़ाना, पुर, सिवाड़ा, कुंगड और जाटू लोहारी में मुख्यरूप से धान की खेती होती है। यहां पर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन व पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
वीडियो कॉन्फ्रेंस में कृषि एवं कल्याण विभाग के महानिदेशक डीके बेहरा ने भी जरूरी निर्देश दिए। इस दौरान अतिरिक्त उपायुक्त मनोज कुमार, जिला राजस्व अधिकारी संजय बिश्रोई, कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. वजीर सिंह, सहायक अभियंता नसीब सिंह धनखड़ व बलबीर शर्मा मौजूद थे।

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